वाराणसी.देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जिक्र आते ही सबसे पहले जय जवान, जय किसान का नारा याद आता है। शास्त्री जी ने इस नारे के अलावा"राष्ट्र देवो भवः" का मंत्र भी दिया था। यह मंत्र उन्होंने वाराणसी मेंसंपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दिया था।हर साल 11 जनवरी को लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि मनाई जाती है। ताशकंद में शास्त्री जी ने विश्व शांति के लिए कहा था कि लड़ाई से समस्याएं सुलझती नहीं है, और पैदा होती है। शांति के लिए मतभेद दूर होना चाहिए। दैनिक भास्कर शास्त्री जी के जीवन से जुड़े कुछ किस्से आपके साथ साझा कर रहा है।
पहला किस्सा
शास्त्रीजी ने कहा- आप सेना के वीर योद्धा, रोइए मत
साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने बताया कि, 1965 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था। तमाम भारतीय सैनिक घायल हुए थे। उनका इलाज दिल्ली के मिलिट्री अस्पताल में चल रहा था। प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री घायल सैनिकों से मुलाकात करने के लिए अस्पताल पहुंचे। वे घायल मेजर भूपेंद्र सिंह के पास पहुंचे। शास्त्रीजी ने अपना एक हाथ मेजर के सिर पर रखा तो दूसरा हाथ से उनके हाथों को पकड़ लिया। मेजर की आंखों में आंसू थे। शास्त्रीजी ने उस वक्त कहा था- आप भारतीय सेना के वीर योद्धा हैं, रोइए मत। मेजर फफक पड़े। मेजर ने कहा- मैं बम से घायल होकर नहीं रो रहा हूं। बल्कि मेरे सामने देश का प्रधानमंत्री खड़ा है और मैं सैल्यूट नहीं कर पा रहा हूं। इसलिए आंखें नम हो गई। तब शास्त्रीजी ने दोनों हाथों को जोड़कर अभिभावदन किया था।
दूसरा किस्सा
अलग बिल बनाने पर मित्र अलगू राय पर भड़क उठे थे शास्त्रीजी
नीरजा बताती हैं कि,लाल बहादुर शास्त्री की आजमगढ़ पूर्व लोकसभा (अब घोषी) के पहले सदस्य अलगू राय शास्त्री से गहरी मित्रता थी। शास्त्रीजी को मेरठ से लाहौर वार्षिक बैठक में जाना था। तब अलगू राय उनके साथ लाहौर गए थे। रास्ते में दोनों ने कुछ दूरी तांगे की सवारी कर तय की। जब तांगे से अलगू राय और शास्त्रीजी उतरे तो दोनों ने अपना-अपना अलग-अलग किराया का बिल बनाया। जबकि शास्त्रीजी अपना व अलगू रायजी का बिल एक साथ बना चुके थे। शास्त्रीजी को यह बात जैसे ही पता चला कि, अलगू राय ने अपना बिल अलग बनाया है तो बोल पड़े कि, जब हम दोनों एक ही तांगे पर बैठे तो बिल क्यों आपने बना दिया। शास्त्रीजी की नाराजगी देख अलगू राय को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने अपना बिल वापस ले लिया।
तीसरा किस्सा
छात्रों को दिया था राष्ट्र देवो भव: का मंत्र
नीरजा ने बताया-बात 27 दिसंबर 1965 कोलाल बहादुर शास्त्रीजी वाराणसी में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आए थे। तब उन्होंने उपाधिधारक छात्रों से राष्ट्र भावना के तहत कार्य करने के लिए प्रेरित किया था। अपने उद्बोधन में शास्त्रीजी ने कहा था- एक मंत्र है "मातृ देवो भवः" मां की भक्ति के साथ मातृ भूमि के प्रति कर्तव्य की ओर आपको आकृष्ट करेगा। आप जैसे स्नातकों को "राष्ट्र देवो भवः" जैसे नवीन मंत्रो पर भी कार्य करना होगा।
जानिए नीरजा माधव को
साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन पर एक पुस्तक 'भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री' लिखी है। इसका विमोचन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 19 जनवरी 2015 को रामनगर में किया था। उस समय मोहनभागवत ने कहा था- रामचरित मानस की तरह से सभी को ये पुस्तक भी घर में रखनी और पढ़नी चाहिए। नीरजा माधव ने शास्त्रीजी के जीवन से जुड़े कई किस्सों को अपनी किताब में समाहित किया है।
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