वॉशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को राष्ट्र को संबोधित किया। ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने इराक में जो हमला किया, उसमें कोई अमेरिकी सैनिक नहीं मारा गया। उन्होंने कहा कि ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी को पहले ही मार देना चाहिए था, क्योंकि वह अमेरिकी ठिकानों पर हमले की साजिश रच रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हम ईरान को कभी परमाणु शक्ति नहीं बनने देंगे।
ईरान ने बुधवार सुबह इराक में के अल असद और इरबिल में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 22 मिसाइलें दागीं। ईरान ने दावा किया कि इस हमले में 80 अमेरिकी सैनिक मारे गए। ट्रंप ने कहा- मेरे आदेश पर दुनिया के सबसे बड़े आतंकी सुलेमानी की हत्या की गई। उसे बहुत पहले मार दिया जाना चाहिए था। वह अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमला करना चाहता था। ईरान पर कड़ा प्रतिबंध लगा रहेगा। शुक्रिया के बदले वे 'डेथ टू अमेरिका' बोल रहे थे। सुलेमानी ने आतंक को बढ़ावा दिया।
"शांति स्थापित करने के लिए हम तैयार'
- ट्रम्प ने कहा- ऐसा लग रहा है कि ईरान झुक गया है और यह सभी संबंधित पक्षों के लिए अच्छी बात है।
- "मध्य-पूर्व में तब तक शांति स्थापित नहीं की जा सकती है, जब तक ईरान आतंकवादी गतिविधियों को नहीं रोकता है। हम चाहते हैं कि आपका भविष्य अच्छा हो। हम शांति स्थापित करने के लिए तैयार हैं।'
- अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐलान किया कि ईरान पर अतिरिक्त आर्थिक प्रतिबंध लगाएंगे। उन्होंने कहा कि यूरोप को भी ईरान परमाणु संधि से दूरी बना लेनी चाहिए, क्योंकि यह बेवकूफी भरी है।
- उन्होंने सुलेमानी की हत्या को आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम बताया और कहा कि पिछले हफ्ते हमने दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी को मार दिया।
- "ईरान को परमाणु ताकत बनने का ख्वाब छोड़ देना चाहिए। हम ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे। सुरक्षा परिषद के सदस्यों..रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन को हमारा साथ देना चाहिए। मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है।"
ईरान का दावा- 80 सैनिक मारे, निशाने पर 100 अमेरिकी ठिकाने
ईरान ने जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए बुधवार सुबह इराक के अल-असद बेस और इरबिल में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 22 बैलिस्टिक मिसाइल दागीं। ईरानी ने दावा किया है कि इन हमलों में 80 ‘अमेरिकी आतंकी’ मारे गए। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने कहा कि इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला उनके लिए करारा तमाचा है। अमेरिकी सेना को पश्चिम एशिया क्षेत्र को छोड़ना होगा। ईरान के निशाने पर अभी 100 अमेरिकी ठिकाने और हैं। अगर अमेरिका ने पलटवार की कोशिश की, तो वह इन ठिकानों पर हमला करेगा।
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